बिहार में जहरीली शराब कांड के बीच 700 की आबादी वाला गांव पूरे देश के लिए पेश कर रहा नजीर, आप भी कहेंगे वाह क्या बात है!

VAISHALI : बिहार के सारण जिले के छपरा जहरीली शराबकांड के बाद भले ही बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर कई सवाल उठ रहे हो, लेकिन इसी बीच प्रदेश में एक ऐसा गांव भी है, तो इस कानून को सफल बनाने में पूरी शिद्दत के साथ लगा है। दरअसल शराब को सामाजिक बुराई बता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कह दिया है कि पिओगे तो मरोगे। ऐसे में वैशाली जिले का एक गांव ना सिर्फ नीतीश कुमार के शराब मुक्त बिहार के सपने को साकार कर रहा है बल्कि नशामुक्ति के लिए एक उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहा है।

पिओगे तो मरोगे भले ही नीतीश कुमार के इस बयान पर बिहार में सियासी घमासान मचा है। लेकिन, शराब को सामाजिक बुराई बताते हुए नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी कानून लागू किया था। ऐसे में बिहार को शराब मुक्त बनाने का जो सपना नीतीश कुमार ने देखा है वह वैशाली के एक छोटे से गांव में साकार हो रहा है। एक ऐसा गांव जहां शराब ही क्या किसी भी तरह का नशा करना अपराध माना जाता है। एक ऐसा गांव जहां नशा तो दूर कोई मांसाहार का सेवन तक नहीं करता। शायद यही वजह है कि अब यह गांव बिहार और देश के लिए नजीर बन सकता है।

700 लोग करोड़ों लोगों को दे रहे सीख

दरअसल हम बात कर रहें है वैशाली प्रखंड क्षेत्र में स्थित कुशवाहा टोला की जिसकी आबादी भले ही 700 सौ के करीब है लेकिन यहां के लोगों की सोच लाखों करोड़ों लोगो के लिए एक सबक है। गांव के गुड्डू कुमार, वैधनाथ भगत, बताते है कि पूर्वजो के समय से ही इस गांव के लोग शाकाहारी है और आधुनिकता के इस दौर में भी किसी तरह का नशा करना इस गांव के लोगो के लिए अपराध से कम नहीं है, तभी तो गांव में चल रहे किसी दुकान में शराब तो दूर पान मसाला या गुटखा तक नहीं बिकता है और तो और इस गांव की खूबी को देख कर अब आस पास के गांव के लोग भी नशामुक्ति की तरफ कदम बढ़ाने लगे है और गांव से सिख लेकर मांस मदिरा से दूरी बनाने लगे है।

विवाद थाना नहीं, आपस में सुलझा लेते हैं

माना जाता है कि नशा करने से कई तरह की बीमारी होती है लेकिन कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में भी इस गांव में ना तो कोई बीमार हुआ और ना ही किसी की जान गई। इतना ही नहीं यहाँ के लोगो को शायद ही कभी थाना पुलिस का चक्कर लगाना पड़ता है क्योंकि बड़े बड़े विवाद यहाँ होते नहीं है और कुछ छोटे मोटे विवाद होते भी है तो गांव वाले मिल बैठकर उसे सुलझा लेते है। लिहाजा नशामुक्त समाज और नशामुक्त बिहार बनाना है तो इस गांव से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, जहां के लोग भले ही कम पढ़े है लेकिन समाज को स्वास्थ और नशामुक्त बनाने का जो फूल ग्रामीणों ने गांव में खिलाया है उसकी खुशबू से पूरा इलाका सुगन्धित होने लगा है। ऐसे में जरूरत है कि हम और आप भी कुशवाहा टोला की इस पहल से सिख लेकर अपने घर और गांव को नशामुक्त बनाए।